भारतीय समाज बहुत ही ज़्यादा डाइवर्स है और देश के अलग-अलग क्षेत्रों में रहने वाले समुदायों की अपनी ऐतिहासिक बैकग्राउंड, कल्चरल आइडेंटिटी और सामाजिक परिस्थितियाँ रही हैं। इन्हीं समुदायों में एक महत्वपूर्ण नाम शेरशाहबादी समुदाय का है जो ख़ास तौर पर बिहार के सीमांचल क्षेत्र में स्थित है।
शेरशाबादी कम्युनिटी पूरे तौर पर पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद से लेकर किशनगंज, पूर्णिया,अररिया,सुपौल, कटिहार और भागलपुर बेल्ट में और झारखंड के साहेबगंज एरिया में बसे हुए हैं जोकि शेरशाहसुरी का शासन क्षेत्र हुआ करता था। ऐतिहासिक रूप से यह समुदाय शेरशाहसुरी की सेना और प्रशासन से जुड़ा हुआ करता था जिसकी वजह से शेरशाहबादी कहा जाता है। लेकिन शेरशाहसुरी का राज खत्म होने के बाद इनकी राजनीतिक और आर्थिक परिस्थितियाँ बिगड़ने लगी और यह धीरे-धीरे सामाजिक एवं आर्थिक रूप से पिछड़ता चला गया।
आज शेरशाहबादी समुदाय को बिहार सरकार के अत्यंत पिछड़े समुदायों में गिना जाता है। इसके पीछे केवल आर्थिक कारण ही नहीं है बल्कि सामाजिक, शैक्षणिक, मानसिक और सांस्कृतिक कारण जिम्मेदार हैं। यदि किसी समाज को आगे बढ़ना है तो उसे शिक्षा, सहयोग, सकारात्मक सोच और आधुनिक दृष्टिकोण अपनाना पड़ता है। दुर्भाग्य से शेरशाहबादी समाज में आज भी पुरानी सोच और सामाजिक कमजोरियाँ विकास में बाधा बनी हुई हैं।
इनकी इतिहास क्या?
शेरशाह सूरी भारतीय इतिहास के महान शासकों में गिने जाते हैं। उनके शासनकाल में प्रशासनिक सुधार, सड़क निर्माण और मजबूत सैन्य व्यवस्था स्थापित हुई थी। माना जाता है कि शेरशाहबादी समुदाय के पूर्वज शेरशाहसुरी की सेना और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े हुए थे। लेकिन शेरशाह सूरी के शासन के पतन के बाद इस समुदाय की राजनीतिक और आर्थिक स्थिति कमजोर हो गई। सेना और प्रशासन से जुड़े लोग बेरोजगार होते चले गए और धीरे-धीरे खेती और किसानी तथा मजदूरी पर निर्भर हो गए।
समय के साथ जब अन्य समुदाय शिक्षा और व्यापार की ओर बढ़े, तब शेरशाहबादी समाज का बड़ा हिस्सा खेतीबाड़ी तक सीमित रह गया और बाक़ी लोग मज़दूर बन गए। खेतीबाड़ी भी आधुनिक तकनीक से नहीं जुड़ सकी बहुत ही छोटे छोटे ज़मीन की हिस्सेदारी की वजह से। जिसके कारण आर्थिक स्थिति में कोई सुधार नहीं हो पाया।
आजके समय में शेरशाहबादी क्यों इतना पिछड़ा है?
1. शिक्षा की कमी:
किसी भी समाज के विकास की पहली सीढ़ी शिक्षा होती है। लेकिन शेरशाहबादी समुदाय में शिक्षा का स्तर बहुत ही ज़्यादा गिरा हुआ है। और ख़ासकर महिलाओं की शिक्षा की बात कर ही नहीं सकते कि क्या स्थिति है। गांवों में पढ़ाई को प्राथमिकता दी ही नहीं जाती है। आज शेरशाहबादी इलाके में इनकी हालत इतनी बुरी है कि बताया नहीं जा सकता है। आज भी हर मिलेनियम जेनरेशन के 100 लोगों में 80 से 90 लोग अनपढ़ और अशिक्षित हैं। माँ बाप बच्चों को पढ़ने से ज्यादा मजदूरी कराने पर निर्भर है। जिसके कारण साक्षरता दर बढ़ नहीं पा रहा।
जब बच्चा 10 या 12 साल का हो जाता है तो उसे किसी और राज्य पैसा कमाने के लिए भेज देते हैं। उन्हें पढ़ने के लिए कभी न कहते हैं और नहीं ही एफर्ट डालते हैं। 10 या 12 साल का लड़का जिसके पास कोई स्किल नहीं होता है वो दूसरे राज्य मज़दूरी, सरिया का काम या फिर किसी के घर लगुआ मज़दूर बन जाता है। जिसको न कोई अच्छी सैलरी और न ही कोई अच्छी मजदूरी मिलती है। जिसके कारण उसके घर का इनकम इतना नहीं होता कि एक अच्छी लाइफ का सपना देख सके।
2. सामाजिक मानसिकता:
किसी भी समाज की प्रगति के लिए आपसी सहयोग बहुत ज़रूरी होता है। लेकिन शेरशाहबादी समाज में आपसी ईर्ष्या (jealous) एक आम सी बात है। यदि किसी परिवार का कोई बच्चा पढ़ाई में आगे बढ़ता है या कोई व्यक्ति आर्थिक रूप से मजबूत होता है तो समाज के लोग उसका समर्थन करने और उससे सीख लेने के बजाए आलोचना करने लगते हैं। यह भी देखने को मिलता है कि लोग दूसरों की सफलता को प्रेरणा की तरह लेने के बजाय उसे नीचा दिखाने की कोशिश करते हैं। ऐसी मानसिकता से सामूहिक विकास की भावना कमजोर पड़ती है। जबकि अन्य विकसित समुदायों में लोग एक-दूसरे की मदद करके आगे बढ़ते हैं।
एक और चीज़ जोकि बहुत ही आम है वह यह कि अगर किसी ने कोई एक बिजनेस आइडिया लेकर उसे स्टार्ट करता है तो दूसरे लोग भी उसी बिजनेस को करने लगते हैं। जबकि मार्केट उतनी ही बड़ी है जितने में मुश्किल से 1-2 दुकान या बिजनेस अच्छे से चल सकता है। लेकिन लोग एक दूसरे को देखते हुए एक ही जैसा बिजनेस करने लगते हैं। जिससे किसी की आमदनी अच्छी नहीं होती है और फिर सबका बिजनेस ढप हो जाता है।
3. महिलाओं की स्थिति:
किसी भी समाज की प्रगति महिलाओं की स्थिति पर निर्भर करती है। यदि महिलाएँ शिक्षित, जागरूक और आत्मनिर्भर हों तो पूरा समाज तेजी से आगे बढ़ता है। लेकिन शेरशाहबादी समाज के इलाक़े में महिलाओं की स्थिति बहुत ज्यादा बेकार है। अशिक्षा के कारण वे सामाजिक और आर्थिक निर्णयों में सक्रिय भूमिका नहीं निभा पातीं हैं।
ग्रामीण इलाकों में आज भी महिलाओं का अधिकांश समय घरेलू विवाद, आपसी झगड़े और सामाजिक आलोचना में बीत जाता है। इनकी ज़्यादातर औरतें न पढ़ी लिखी हैं और न ही उतनी समझदार जिसके कारण जब भी इसके पास खाली समय होता है एक दूसरे की बुराई में लगी रहती हैं। और यह समस्या कई परिवारों की प्रगति में बाधा बनती है। जब परिवार का वातावरण सकारात्मक नहीं होता तो बच्चों की शिक्षा और भविष्य भी प्रभावित होता है।
इसके अलावा, लड़कियों की शिक्षा और करियर को लेकर एक अलग ही सोच देखने को मिलती है। यदि कोई लड़की उच्च शिक्षा प्राप्त करना चाहती है तो समाज के कुछ लोग बजाय उसको सपोर्ट करने के ताने देने लगते हैं। समाज के तानों के डर से न लड़कियाँ पढ़ने की सोच पाती है और न ही जिंदगी को बेहतर बना पाती हैं।
शेरशाहबादी समाज में बाल विवाह और कम उम्र में शादी की परंपरा एक आम सी बात है। कम उम्र में विवाह होने के कारण लड़कियाँ छोटे उम्र में ही माँ बन जाती हैं और कम उम्र से ही बड़े बड़े बीमारियों का शिकार हो जाती हैं। कई एक बार यह भी देखा गया है कि लड़की अपनी जिंदगी से हाथ भी धो बैठती हैं। बालविवाह के कारण बहुत बार लड़कियों का कम उम्र में तलाक़ तक हो जाता है क्यों कि उसको उतना ज्ञान नहीं होता है कि मैच्योर इंसान की तरह बिहेव कर सके।
4. आर्थिक पिछड़ापन और रोजगार की कमी:
इस समुदाय का बड़ा हिस्सा आज भी कृषि और मजदूरी पर निर्भर है। सीमांचल और आसपास के क्षेत्रों में उद्योगों की कमी के कारण रोजगार के अवसर सीमित हैं। जिसकी वजह से बड़ी संख्या में युवा दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, मुंबई और अन्य राज्यों में मजदूरी के लिए पलायन करते हैं। आर्थिक असुरक्षा के कारण कई परिवार अपने बच्चों की पढ़ाई पर पर्याप्त खर्च नहीं कर पाते और न ही अच्छा इलाज करा पाते हैं। जिसकी वजह से वे आधुनिक जीवन नहीं जी पाते हैं।
5. पीड़ित मानसिकता और आत्मविश्वास की कमी:
समाजशास्त्र के अनुसार किसी भी समुदाय को आगे बढ़ने के लिए आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच की आवश्यकता होती है। लेकिन लंबे समय तक गरीबी और पिछड़ेपन में रहने के कारण कई लोगों में यह भावना विकसित हो जाती है कि वे कभी आगे नहीं बढ़ सकते। यह मानसिकता विकास की सबसे बड़ी बाधाओं में से एक है।
शेरशाहबादी कम्युनिटी में अक्सर लोग अपनी समस्याओं का समाधान खोजने के बजाय परिस्थितियों को ही दोष देते रहते हैं। जबकि वास्तविक परिवर्तन तभी संभव है जब समाज खुद अपने भीतर सुधार लाने का प्रयास करे। केवल सरकार या बाहरी सहायता से किसी समुदाय का संपूर्ण विकास संभव नहीं होता।
इनके दिमाग में हमेशा यही रहता है कि “हम तो गरीब हैं, पढ़ाई-लिखाई हमारे लिए नहीं है, ये तो अमीर लोगों के लिए है” वगैरह। यह कम्युनिटी अपने आपको इतना कमज़ोर समझ चुकी है कि उन्हें ये लगता है कि हम कभी इस गरीबी से निकल नहीं सकते जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं है। मेहनत करने से इंसान कुछ भी कर सकता है।
6. रूढ़िवादी मानसिकता:
समाज में अगर दो चार So-called पढ़े लिखे लोग हैं तो वो चाहते हैं कि बाकी लोग न पढ़े । ताकि उनकी रूढ़िवादी सोच को चैलेंज न किया जा सके। वे लोग चाहते है कि आने वाली जेनरेशन हमसे ज़्यादा न पढ़े लिखे। ताकि उनको अंधेरे में रख कर बेवकूफ बनाया जा सके और जीहुजूरि करवाया जा सके। समाज अगर आज बर्बाद है तो सिर्फ इन लोगों की वजह से है।
समाधान क्या है?
1. शेरशाहबादी समुदाय को आगे बढ़ने के लिए सबसे पहले शिक्षा पर विशेष ध्यान देना होगा। विशेषकर लड़कियों की शिक्षा को प्राथमिकता देनी होगी। यदि हर परिवार यह संकल्प ले कि उसके बच्चे कम से कम स्नातक तक शिक्षा प्राप्त करेंगे तो आने वाले वर्षों में बड़ा बदलाव संभव है।
2. समाज में सकारात्मक सोच और सहयोग की भावना विकसित करनी होगी। दूसरों की सफलता से जलने के बजाय उसे प्रेरणा के रूप में लेना चाहिए। यदि समाज के पढ़े-लिखे और सफल लोग अपने समुदाय के युवाओं का मार्गदर्शन करें तो नई पीढ़ी को दिशा मिल सकती है।
3. बाल विवाह जैसी प्रथाओं को समाप्त करना होगा। लड़कियों को उच्च शिक्षा और करियर बनाने का अवसर देना आवश्यक है। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कौशल विकास और रोजगार से जोड़ना भी जरूरी है।
4. आधुनिक कृषि, छोटे उद्योग, व्यापार और डिजिटल शिक्षा की ओर युवाओं को प्रेरित करना होगा। केवल पारंपरिक खेती पर निर्भर रहने से आर्थिक स्थिति में बड़ा सुधार संभव नहीं है।
5. सामाजिक विवादों और आपसी झगड़ों से दूर रहकर सामूहिक विकास की दिशा में काम करना होगा। यदि समाज के लोग मिलकर स्कूल, कोचिंग, लाइब्रेरी और सामाजिक संस्थाएँ विकसित करें तो नई पीढ़ी को बेहतर अवसर मिल सकते हैं।
6. सबसे बड़ी जरूरत है कि अपनी अंधविश्वास जैसे प्रैक्टिस को छोड़ना होगा और खुदको को आधुनिक जीवन की तरफ ले जाना होगा। कल्चर अच्छी चीज़ है लेकिन अंधविश्वास गलत है।
7. समाज के पढ़े लिखे लोगों को रूढ़िवादी सोच से बाहर निकलने की बहुत ही ज़रूरत है। और नई जेनेरेशन को एक मौका देने की।
शेरशाहबादी समुदाय का पिछड़ापन केवल एक कारण का परिणाम नहीं है। इसके पीछे ऐतिहासिक पतन, शिक्षा की कमी, आर्थिक कमजोरियाँ, सामाजिक बुराइयाँ और नकारात्मक मानसिकता जैसे कई कारण जिम्मेदार हैं। आज इस समुदाय के कई युवा शिक्षा, प्रशासन, व्यवसाय और सामाजिक कार्यों में आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं। यदि समाज सामूहिक रूप से शिक्षा, सहयोग, महिला सशक्तिकरण और आधुनिक सोच को अपनाए तो आने वाले समय में शेरशाहबादी समुदाय भी देश के विकसित और प्रगतिशील समुदायों में अपनी पहचान बना सकता है।
हर समाज में कमियाँ होती हैं लेकिन सुधार की संभावना भी हमेशा मौजूद रहती है। ज़रूरत इस बात की है कि समाज अपने अतीत से सीख लेकर भविष्य की ओर सकारात्मक कदम बढ़ाए।

